Tuesday, July 27, 2021
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ब्रिटिश संसद में हुई चर्चा में दिशा रवि और नौदीप कौर की गिरफ्तारी,किसान मोर्चों की घेराबंदी और मीडिया की आजादी का मुद्दा

ब्रिटिश संसद में हुई चर्चा में दिशा रवि और नौदीप कौन की गिरफ्तारी, कटीलें तारों-कीलों से किसान मोर्चों की घेराबंदी और मीडिया की आजादी का मुद्दा उठा नये कृषि कानूनों के खिलाफ कई महीनों से जारी किसान आंदोलन पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। पिछले सप्ताह ‘टाइम’ मैग्जीन ने किसान आंदोलन को कवर स्टोरी बनाया तो सोमवार को ब्रिटिश संसद ने भारत में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रेस की आजादी पर चर्चा ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया।

भारत सरकार ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए नई दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस को तलब किया है। लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इस चर्चा को तथ्यहीन और पक्षपातपूर्ण करार दिया है।किसान आंदोलन की शुरुआत से ही कनाडा और ब्रिटेन में भारतीय मूल के कई नेता किसानों का समर्थन कर रहे हैं। भारत सरकार इसे देश के अंदरुनी मसले में दखल बताते हुए खारिज करती रही है जबकि भाजपा के समर्थन इसे खालिस्तानी अभियान का हिस्सा बताकर अटैक करते हैं। ये दोनों ही प्रतिक्रियाएं अपनी-अपनी जगह नाकाम रही हैं और किसान आंदोलन लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में बना हुआ है। इस बार जिस तरह यह मुद्दा ब्रिटिश संसद तक पहुंचा, वह अपने आप में अभूतपूर्व है। ब्रिटिश संसद में भारत के किसान आंदोलन की चर्चा के लिए लगी ऑनलाइन पिटीशन को 115,867 ब्रिटिश नागरिकों का समर्थन मिला तो ब्रिटिश संसद में इस पर चर्चा करानी पड़ी।

ब्रिटेन के नागरिक किसी मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए पिटीशन लगा सकते हैं। किसी पिटीशन को एक लाख लोगों का समर्थन मिलता है तो उस पर संसद में बहस होती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मेडनहेड के लिबरल डेमोक्रेट पार्षद गुरचरण सिंह ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाने के लिए किया। चूंकि भारत के कृषि कानूनों को लेकर ब्रिटिश संसद में सीधे तौर पर चर्चा नहीं हो सकती है। इसलिए पिटीशन में ब्रिटेन सरकार से मांग की गई है कि वह भारत सरकार से प्रेस की आजादी और प्रदर्शनकारी किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपील करे। मानवाधिकार से जुड़े मुद्दाें पर ऐसी अपील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करते रहते हैं।सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में डेढ़ घंटे चली चर्चा में ब्रिटिश सांसदों ने माना कि कृषि सुधार भारत का आंतरिक मामला है, लेकिन साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान किसानों की मौतों, दिशा रवि और नौदीप कौर की गिरफ्तारी, पत्रकारों पर मुकदमें और इंटरनेट व मीडिया की आजादी पर अंकुश को लेकर चिंताएं जाहिर की।

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